कहा जाता है कि शेरशाह सूरी ने पुराने किला की नीव रखी। जिसकी मरम्मत शाह
क़ुतुब मीनार के इतिहास की तरह दिल्ली के इस पुराना किला का इतिहास भी काफी विवादों से घिरा रहता है। कुछ इतिहासकार इसे इस्लामिक सभ्यता से जोड़ते है। तो वहीं कुछ महाभारत काल से जोड़ते है। वैसे तो पुराना क़िला को 1540 का बताया जा रहा है। लेकिन अगर हम महाभारत की माने तो यह किला कई हज़ारों साल पुराना लगता है। तो आज आप पुराना किला के सबसे सटीक इतिहास के बारे में जानेंगे। और साथ ही पुराना किला से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बातों को भी जानेंगे।
दिल्ली के इंडिया गेट के नजदीक यह पुराना किला स्थित है। लगभग 1.5 किलोमीटर के तिकोने आकार में बने किले को दिल्ली का सबसे बड़ा किला भी माना जाता है। पुराने किले के पास ही दिल्ली का चिड़ियाघर भी मौजूद है। जिसके कारण हर दिन हज़ारों सैलानी इस किले को देखने आते है।
यह पुराना किला इतना पुराना हो चूका है कि अब इसके वजूद मिटने लगे हैं। इस किले में कई कमरे टूट चुके हैं और अब यह किला खण्डहर जैसा दिखने लगा है। पुराना किला, दिल्ली का सबसे पुराना किला होने के कारण इसका नाम पुराना किला रखा गया। वैसे इस किले का असली नाम शेर का किला है, कुछ इतिहासकार इस किले का असली नाम पांडव का किला भी बताते है।
पुराने किले के इतिहास से जुड़ी बातें
वैसे तो पुराना किला में कई बार खुदाई की गयी। इसमें पहली खुदाई 1955 में हुई, और दूसरी खुदाई 1969 से 1973 के बीच हुई। इस खुदाई में मौर्या काल, कुषाण काल, शुंग काल, गुप्त काल, और मुग़ल काल के सिक्के, मट्टी के खिलौने, मिट्टी के बर्तन, और मूर्तियां मिली। बाद में 2013 और 2014 के बीच फिर खुदाई हुई। और अभी तक आखरी खुदाई 2017 में की गई।
इन खुदाई में मिली वस्तुओं को वैज्ञानिक 3000 साल पुराना बता रहें है। लेकिन इस खुदाई में ऐसे कोई पक्के चिन्ह नहीं मिले जिससे यह कहा जा सके कि यह महाभारत के पांडवों द्वारा बनाया गया है।
भारतीय ग्रन्थ महाभारत की मानें तो, धृष्टराज ने कौरवों और पांडवों की शांति के लिए उन्हें अलग अलग रहने को कहा। जिसमे पांचों पांडवों को हस्तिनापुर को छोड़ने का आदेश मिला। पांडवों ने यमुना नदी के किनारे इंद्रप्रस्थ (दिल्ली) नाम का शहर बसाया। जिसमे उन्होंने अपने रहने के लिए एक महल बनाया जो आज पुराना किला के नाम से जाना जाता है।
पुराना किला किसने बनवाया ?
लेकिन 1545 में ही शेरशाह सूरी को युद्ध में हराने के बाद हुमायूँ ने फिर से दिल्ली पर कब्ज़ा कर लिया था। शुरुआत में पुराने किले को शेरशाह सूरी पूरा नहीं बनवा पाया था। जिसे बाद में हुमायूँ ने पूरा करवाया। 1920 के दशक में ब्रिटिश सरकार ने पुराने किले को राजपथ से जोड़ दिया। भारत के विभाजन के बाद इस किले को मुसलमानों द्वारा शरणार्थी शिविर के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा।
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पुराने किले से जुड़े कुछ रोचक तथ्य
किले के नजदीक ही एक कुंतीदेवी मंदिर है। जब पांडव यहाँ रहने आए थे तब पांडवों की माता कुंती ने इस मंदिर को बनाया था। इसके बारे में कहा जाता है कि यही सिर्फ एक ऐसा सबूत है जो पुराना किला को महाभारत से जोड़ता है।
पुराने किले में इस्तेमाल की जाने वाले लाल बलुआ पत्थर को राजस्थान के पहाड़ों से लाया गया था। इसके लिए 500 से भी ज्यादा हाथियों का इस्तेमाल किया गया था। सफ़ेद संगमरमर को अफगान और ईरान से लाया गया था।

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