ताजमहल इतिहास ? Tajmahal History

ताजमहल इतिहास


दुनिया के सात अजूबों में पहला ताजमहल एक बहुत ही लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। यहां ठीक से घूमने के लिए आपको एक अच्छे ट्रैवल गाइड की जरूरत पड़ेगी। एक गाइड के बिना आप ताजमहल को ठीक से नहीं जान पाएंगे और आप इसके वैल्यू को नहीं समझ पाएंगे। यहां हर साल करोड़ों पर्यटक घूमने आते है, और पूरी जानकारी के अभाव में अधिकतर लोग भ्रमित हो जाते हैं।

ताजमहल इतिहास ? Tajmahal History

ताजमहल - सम्पूर्ण यात्रा

ताजमहल भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के आगरा शहर में स्थित है। जो विश्व का सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। ताजमहल अपने इतिहास के कारण भी काफी लोकप्रिय रहा है। 2007 में, ताजमहल को दुनिया के सात अजूबों में से पहला घोषित किया गया था। इसके बाद ही ताजमहल पहले से भी ज्यादा लोकप्रिय हो गया। ताजमहल देखने के लिए आज हजारों की संख्या में सैलानी रोजाना आते हैं।


ताजमहल परिसर के अंदर जाने के लिए तीन गेट (ईस्ट गेट, वेस्ट गेट और साउथ गेट) हैं। आप परिसर में मोबाइल, कैमरा और पानी की बोतल ले जा सकते हैं। लेकिन अन्य बड़े सामान जैसे बड़े बैग या कोई अन्य सामान नहीं ले जाया जा सकता है। इसके लिए टिकट काउंटर के पास क्लॉकरूम की सुविधा दी गई है। जहां आप अपना सामान वहां जमा कर सकते हैं।


ताजमहल के अंदर जाने के लिए, आपको अपना टिकट सत्यापित करना होगा। इसके लिए आप 2 घंटे की लंबी लाइन में खड़े होना होगा। या आप एक स्थानीय फोटोग्राफर को बुक कर सकते हैं और दूसरे शॉर्टकट से ले जा सकते हैं। ताजमहल के अंदर जाने के कई ऐसे रास्ते हैं जिनके बारे में सिर्फ लोकल लोग ही जानते है।

ताजमहल के अंदर

ताजमहल का मुख्य आकर्षण परिसर के बीच में स्थित सफेद संगमरमर का मकबरा है। जिसके तहखाने में मुमताज महल और शाहजहाँ का मकबरा स्थित है। यह मकबरा सफेद संगमरमर से बना है, जिस पर कीमती गहनों से सुंदर नक्काशी की गई है। इसमें आपको भारतीय, इस्लामी, तुर्की और फारसी वास्तुकला का अनूठा तालमेल देखने को मिलेगा।


ताजमहल के अंदर



अगर आप किसी गेट से अंदर आते हैं तो आपको सबसे पहले मेन गेट पर जाना होगा, जिसे रॉयल गेट के नाम से भी जाना जाता है। यहां से आप ताजमहल के दर्शन कर सकेंगे।


खास बात यह है कि ताजमहल के चारों कोनों पर स्थित ये चारों मीनारें बाहर की ओर झुकी हुई हैं। इन्हें इस तरह से डिजाइन किया गया है कि अगर किसी कारण से ये मीनार गिर भी जाएं तो बाहर की ओर गिरेंगे। जिससे ताजमहल को कोई नुकसान नहीं होगा।


मुमताज बेगम का असली मकबरा कहाँ स्थित है ?

आप देखेंगे कि ताजमहल के अंदर दो मकबरे हैं। जिनमें से एक शाहजहाँ का बड़ा मकबरा है और दूसरा मुमताज महल का छोटा मकबरा है। वैसे ये दोनों कब्रें नकली हैं और असली कब्र ताजमहल के तहखाने में मौजूद है। मुमताज महल की मृत्यु के बाद शाहजहाँ ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि उनका मकबरा भी मुमताज महल के मकबरे के पास ही बनाया जाए।


मुमताज बेगम का असली मकबरा कहाँ स्थित है ?



इस्लामी संस्कृति के अनुसार मकबरा ऐसा बनाया जाना चाहिए जहां ज्यादा लोग न जा सकें। इसलिए शाहजहाँ ने तहखाने में असली मकबरा बनवाया और ऊपर की पहली मंजिल पर नकली मकबरा बनवाया। इस नकली मकबरे को लोगों के देखने के लिए बनाया गया था। शाहजहाँ चाहते थे कि लोग उसकी कब्रों को देखकर उन दोनों को याद करें।


ताजमहल का इतिहास

ताजमहल का इतिहास बहुत ही अनोखा है। ताजमहल को हमेशा से प्यार का प्रतीक माना गया है। लेकिन https://worldhistoricalhistory.blogspot.com/ इस पर विश्वास नहीं करता। ऐसा ही कुछ अन्य वेबसाइटों पर आपको मिल जाएगा, जिसमें आपको खुश करने के लिए ताजमहल को प्यार का प्रतीक बताया जाता है। लेकिन हम आपको सच बताने आए हैं, आपको लुभाने के लिए नहीं। 

सन 1631 में, शाहजहाँ की तीसरी पत्नी मुमताज महल अपनी आठवीं संतान को जन्म देते समय मृत्यु मर गई। शाहजहाँ मुमताज को बाकी रानियों से ज्यादा प्यार करता था। मुमताज की मौत के बाद शाहजहाँ ने अपने प्यार को यादगार बनाने के लिए ताजमहल बनवाया था। शाहजहाँ चाहता था कि ताजमहल को देखकर दुनिया इस प्यार को याद रखे।


ताजमहल का इतिहास



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