Jaygarh Fort History in Hindi - जयगढ़ किले का इतिहास हिंदी

"Jaygarh Fort" राजस्थान की राजधानी जयपुर के गुलाबी शहर में " चील का तेला " पहाड़ियों के शीर्ष पर स्थित एक बहुत ही भव्य सरंचना है। - World Historical History इस खूबसूरत इमारत को सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा 1726 में आमेर किले की सुरक्षा के लिए बनाया गया था। यह किला चट्टान के शीर्ष पर बँधा हुआ हरे भरे और विशाल जंगों से घिरी एक महलनुमा संरचना है।ऐसा बताया जाता है कि इस शानदार किले से आमेर किले तक एक भूमिगत मार्ग जाता है और और इसे विश्व में “विजय का किला” के रूप में भी जाना जाता है। 


Jaygarh Fort History in Hindi - जयगढ़ किले का इतिहास हिंदी


Table of Contents

History of Jaygarh Fort - जयगढ़ किले का इतिहास
Architecture of Jaygarh Fort - जयगढ़ किले की वस्तुकला
Secrets of Jaygarh Fort - जयगढ़ किले का रहस्य
Important Battle of Jaygarh Fort - जयगढ़ किले की महत्वपूर्ण लड़ाई
Other monuments of Jaygarh Fort - जयगढ़ किले के अन्य स्मारक
कैसे एकठ्ठा किया था मानसिंह ने खजाना ?-
खजाने की भनक सरकार को कब लगी ?-
खजाना किस शहर के विकास में लगाया गया ?-
एशिया की सबसे बड़ी तोप जयगढ़ किले में जिवान तोप है – The largest cannon in Asia is the Jiwan Cannon in the Jaygarh Fort.
तोप की लम्बाई और वजन कितना है ?-
कितने गन पाउडर से चलती थी यह तोप ?-
किला जयगढ़ की कुछ रोचक बाते – Some interesting things about Jaygarh Fort
जयगढ़ किले के आस-पास के पर्यटक आकर्षण – Tourist Attractions Near JaygarhFort

                                       Read More: Bandhavgarh Fort History in Hindi

History of "Jaygarh Fort" - जयगढ़ किले का इतिहास

Jaygarh Fort को तीनों किलों में से सबसे ज्यादा मजबूत कहा जाता है और बताया जाता है की इस किले को कभी भी किसी भी बड़े प्रतिरोध का सामना नहीं करना पड़ा। यहाँ पर जो दुनिया की सबसे बड़ी तोप स्थित है बताया जाता है की उसका केवल एक बार परीक्षण किया गया।

यह किला शहर के समृद्ध अतीत को बताता है और इसका नाम सवाई जय सिंह I शासक के नाम पर रखा गया है, जिसने इसको बनवाया है। जयगढ़ किला 18 वीं शताब्दी में बना हुआ एक निर्मित एक शानदार वास्तुकला है। आमेर किला के साथ जयगढ़ आमेर शहर में स्थित था,

जिस पर 10 वीं शताब्दी की शुरुआत से कछवाहाओं ने शासन किया था। मुगल शासन के दौरान यह किला मुख्य तोप फाउंड्री बन गया था और युद्ध के लिए आवश्यक गोला बारूद के साथ अन्य धातु को रखने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया    

जयगढ़ किले में तोप चौकी तब तक सुरक्षित रही जब तक कि रक्षक दारा शिकोह अपने ही भाई औरंगजेब द्वारा पराजित और मार डाला गया था।

आमेर के राजप्रासाद के दक्षिणवर्ती पर्वत शिखर पर निर्मित जयगढ़ का निर्माण महाराजा मानसिंह प्रथम ने करवाया था. मगर इतिहासकार जगदीश सिंह गहलोत और डॉ गोपीनाथ शर्मा के अनुसार जयगढ़ का निर्माण मिर्जा राजा जयसिंह ने करवाया था, उन्ही के नाम पर यह किला जयगढ़ कहलाता हैं.

जयगढ़ राजस्थान का एकमात्र किला है, जिस पर कभी बाह्य आक्रमण नहीं हुआ. श्रीमती इंदिरा गांधी के प्रतिनिधित्व काल में गुप्त खजाने की खोज में इस किले के भीतर व्यापक खुदाई की घटना ने जयगढ़ को देश विदेश में चर्चित बना दिया.

जयगढ़ उत्कृष्ट गिरि दुर्ग हैं. सुद्रढ़ और उन्नत प्राचीर, घुमावदार विशाल बुर्ज तथा पानी के विशाल टाँके इसके स्थापत्य की प्रमुख विशेषता हैं.

जयगढ़ के भवनों में जलेब चौक, दीवान ए आम, दीवान ए ख़ास ललित मंदिर, विलास मंदिर, लक्ष्मी निवास, सूर्य मंदिर, आराम मंदिर, राणावतजी का चौक आदि मुख्य हैं.

किले में राम, हरिहर व काल भैरव के प्राचीन मंदिर बने हुए हैं. आराम मंदिर के सामने मुगल उद्यान शैली पर निर्मित एक मंदिर हैं. जयगढ़ के भीतर एक लघु अन्तः दुर्ग भी बना हुआ हैं.

जिसमें महाराजा सवाई जयसिंह ने अपने छोटे भाई विजयसिंह को कैद कर रखा था. विजयसिंह के नाम पर यह विजयगढ़ी कहलाया.विजयगढ़ी के पार्श्व में एक सात मंजिला प्रकाश स्तम्भ हैं जो दिया बुर्ज कहलाता हैं.

जयगढ़ में तोपें ढालने का विशाल कारखाना था जो राजस्थान के किसी अन्य किले में नहीं मिलता हैं. महाराजा सवाई जयसिंह द्वारा बनवाई गई एशिया की सबसे बड़ी तोप जयबाण यहीं पहियों पर रखी हुई हैं. जयगढ़ में मध्यकालीन शस्त्राशस्त्रों का विशाल संग्रहालय बना हुआ हैं. 

Architecture of "Jaygarh Fort" - जयगढ़ किले की वस्तुकला

"Jaygarh Fort"  यह एक विशाल रेंज में फैली हुई आकर्षक संरचना है। बताया गया है की यह किला बलुआ पत्थर की मोटी दीवारों द्वारा संरक्षित है जिसमें ललित मंदिर, विलास मंदिर, लक्ष्मी विलास और अराम मंदिर जैसे कुछ खास वास्तुशिल्प हैं।

इसके साथ अलावा 10 वीं शताब्दी में बने राम हरिहर और 12 वीं शताब्दी में बने काल भैरव मंदिर भी इस मंदिर के आकर्षण को बढ़ाते हैं। इस किले का सबसे बड़ा आकर्षण पहियों पर दुनिया की सबसे बड़ी तोप जिसे ‘जयवाना तोप’ और विशाल महल परिसर के रूप में जानते हैं।

इसके अलावा इस किले में साथ एक संग्रहालय के साथ एक उद्यान भी स्थित है। जयगढ़ किले की लाल बलुआ पत्थर की दीवारें 3 किलोमीटर की लंबाई में फैली हुई हैं जिसकी चौड़ाई लगभग एक किलोमीटर है।

इस किले की सीमा के अंदर एक वर्गाकार उधान है और इस किले की इमारत के ऊपरी स्तरों तक पहुँचने के लिए तटबंधों का निर्माण किया गया है। कोर्ट रूम और हॉल को शानदार खिडकियों से सजाया गया है और यहाँ एक केंद्रीय वॉच टॉवर पूरे आसपास के परिदृश्य को देखता है।

यहाँ के अराम मंदिर में प्रवेश अवनी दरवाजा के माध्यम से होता है जो एक बहुत ही शानदार ट्रिपल मेहराबदार प्रवेश द्वार है। अराम मंदिर पास में स्थित सागर झील का आकर्षक दृश्य हर किसी को मोहित कर देता है।

 Read More: Narwar Fort History in Hindi

Secrets of Jaygarh Fort - जयगढ़ किले का रहस्य

आपको बता दें कि बहुत से इतिहासकारों का मानना यह है कि जयगढ़ किले में खजाना था जिससे जयसिंह ने जयपुर शहर का विकास किया। लेकिन यह बात आपको हैरान कर देती है कि अगर सरकार को जयगढ़ किले का खजाना नहीं मिला तो वो खजाना कहाँ गया।

जयगढ़ किला और उसके खजाने का रहस्य हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देता है। हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर इस किले के खजाने का रहस्य कब सुलझ पायेगा।

Important Battle of Jaygarh Fortजयगढ़ किले की महत्वपूर्ण लड़ाई

जयगढ़ किले को युद्ध में कभी नहीं जीता गया था जबकि जयपुर में तीन किलों में से सबसे मजबूत भी था. मुगल वंश के दौरान किले ने औरंगजेब द्वारा घात लगाकर हमला किया था | 

जिसने किले में तोप चौकी के ओवरसियर रहे अपने ही भाई को हरा दिया और मार दिया था. इसके अलावा किले ने कभी कोई बड़ा प्रतिरोध नहीं देखा और केवल एक बार दुनिया की सबसे बड़ी तोप का परीक्षण किया

Other monuments of Jaygarh Fort - जयगढ़ किले के अन्य स्मारक

चारबाग गार्डन :

फारसी शैली में एक सुंदर बगीचा है. चार भागों में विभाजित, इस उद्यान को कई पौधों से सजाया गया है. रॉयल अपार्टमेंट के बाहर स्थित इस उद्यान में विभिन्न शैली के पत्थरों की एक श्रृंखला है. पर्यटक यहाँ पर कुछ गुणवत्ता समय बिता सकते हैं.

जीवान ( तोप ) :

महाराजा सवाई जय सिंह के क्षेत्र के दौरान, जयगढ़ बंदूक फाउंड्री ने पहियों पर दुनिया की सबसे बड़ी तोप का निर्माण किया, जिसे जीवान नाम दिया गया. 50 टन वजन वाले, जयवन को हर शॉट के लिए 100 किलो बारूद की आवश्यकता होती है.

लक्ष्मी विलास :

जयगढ़ किले की सबसे सुंदर इमारत, लक्ष्मी विलास का कई बार जीर्णोद्धार किया गया था और अंतिम जीर्णोद्धार लोकप्रिय वास्तुकार विद्याधर भट्ट द्वारा शासक सवाई जय सिंह द्वितीय के तहत किया गया था.

इस महल का हॉल विशाल है और 12 संगमरमर के खंभों द्वारा समर्थित है. एक कठपुतली थियेटर भी है जो अभी भी सक्रिय है.

                                           Read More: Fatehpur Sikri  History in Hindi 

जयगढ़ किले का संग्रहालय :

"Jaigarh Fort" के अंदर एक सुव्यवस्थित संग्रहालय है जिसमें जयपुर के शासकों के चित्र, पुराने चित्र, टिकट और कई अन्य शाही कलाकृतियाँ शामिल हैं. पर्यटक यहां शाही परिवारों के सोने और चांदी के गहने भी देख सकते हैं.

किले में कितने मंदिर है ? :

किले में दो पुराने मंदिर हैं. 10 वीं शताब्दी में निर्मित राम के लिए राम हरि हर मंदिर और 12 वीं शताब्दी का काल भैरव मंदिर.

पर्यटक ललित मंदिर, विलास मंदिर, अराम मंदिर, विजय गढ़ शस्त्रागार और जल भंडार भी देख सकते हैं.

दीया बुर्ज :

जयगढ़ किले का सर्वोच्च बिंदु दीया बुर्ज है. इस सात मंजिला टॉवर से जयपुर के ध्वज की मेजबानी की जाती है. अभी तक महाराजा के जन्मदिन के अवसर पर अधिकारियों ने यहां एक तेल का दीपक जलाया जाता हैं.

कैसे एकठ्ठा किया था मानसिंह ने खजाना ?

अकबर के नौ रत्नों के बारे में यदि सुना है, तो राजा मान सिंह को आसानी से पहचाना जा सकता है. ये अपनी बुद्धिमत्ता और सैन्य कुशलता के कारण अकबर के दिल के काफी करीब थे. उन्हें प्यार से ‘राजा मिर्जा’ भी कहा जाता था.

बतौर सेनापति मान सिंह ने अकबर के लिए कई ऐतिहासिक जंग जीती थीं.

मुगलों की आदत रही कि उन्होंने ​देश के जिस भी राज्य या रियासत पर हमला किया और जीत हासिल की उसे लूट लिया. चूंकि जीत में मानसिंह का श्रेय भी कम नहीं था, इसलिए संपत्ति में भी उसका बराबर का अधिकार रहा.

मान सिंह से पहले उनके पिता राजा भगवानदास ने भी अकबर के लिए गुजरात युद्ध में मुख्य भूमिका अदा की थी.

मान सिंह पारिवारिक रूप से पहले ही सक्षम थे. उनका जन्म 1540 में हुआ था और वे अम्बेर रियासत के राजा थे. मुगल बादशाह से दोस्ती के बाद उनका कद समस्त भारत में बढ़ गया.

हल्दीघाटी के युद्ध में तो उन्होंने महाराणा प्रताप की सेना को परस्त कर शानदार विजय हासिल की थी. हालांकि, जब मुगलों ने महाराणा प्रताप के राज्य को लूटने की तैयारी की तो मान सिंह ने इसका विरोध किया.

वैसे बादशाह अकबर से मान सिंह का दूसरा रिश्ता फूफा और भतीजे का भी था. 1594 में मान सिंह को बंगाल, उड़ीसा और बिहार का शासक नियुक्त किया गया.

इस दौरान उन्होंने कई छोटी बडी रियासतों के राजाओं को हराकर उनकी संपत्ति अपने नाम की. सालों तक मान सिंह ने अपने पराक्रम के बल पर अकूत संपत्ति जमा कर ली थी.

जिसे उन्होंने अपने आमेर किले में गुप्त स्थान पर छिपाया था. उन्होंने अपने जीवन काल में भारत में जितनी भी रियासतों से संपत्ति हासिल की थी, उससे कई गुना सिर्फ एक बार में अफगानिस्तान से हासिल कर ली.

एक कहानी के अनुसार अकबर के आदेश पर मानसिंह काबुल गए थे. वहां की आवाम लुटेरे सरदारों से काफी परेशान थी. मान सिंह ने सरदारों से मुकाबला कर उन्हें जंग में हरा दिया.

इसी दौरान मान सिंह ने युसुफजई कबीले के सरदार को मारकर बीरबल की मौत का बदला भी लिया. कहा जाता है कि लुटेरों के पास ​कई टन सोना था, जिसे मानसिंह अपने साथ ले आए थे. यह सम्पत्ति उन्होंने मुगलों को न सौंपकर आमेर किले में छिपाई थी.

                                                   Read More: असीरगढ़ का किला (MP)

खजाने की भनक सरकार को कब लगी ?-

मानसिंह के खजाने के बारे में उस दौर में तो कोई चर्चा नहीं हुई, पर इसका जिक्र अरबी भाषा की एक पुरानी किताब हफ्त तिलिस्मत-ए-अंबेरी (अंबेर के सात खजाने) में मिलता है.

इसमें लिखा है कि मानसिंह ने अफगानिस्तान से इतनी संपत्ति लूटी थी कि उससे कई रियासतों को पेट पल सकता था.किताब में कहा गया है कि जयगढ़ किले के नीचे पानी की सात विशालकाय टंकियां बनी हैं. मान सिंह ने खजाना यहीं छिपाया था.

बातें किताबी थीं, सो किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया. अफवाहें जब तब आती और जाती रही, लेकिन यहां बात अकूत संपत्ति की ​थी, तो भला कितने दिन छिपती. इस खजाने की चर्चा पहली बार 1976 में हुई.

उस वक्त जयपुर राजघराने की प्रतिनिधि महारानी गायत्री देवी थीं. गायत्री देवी तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सख्त विरोधी थीं और वे स्वतंत्र पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनावों में तीन बार कांग्रेस प्रतिनिधियों को हरा का मुंह दिखा चुकी थीं.

कहा जाता है कि गायत्री देवी और इंदिरा गांधी में काफी लंबे समय से ठनी थी. 1975 में इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा की थी. यह सरकार की मनमानी का मौका था. जो केन्द्र सरकार के आदेश पर गायत्री देवी को जेल में डाल दिया गया.

उन पर मीसा के तहत नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा कानून उल्लंघन का आरोप लगाया गया था. इस आरोप के बाद इंदिरा गांधी के आदेश पर जयगढ़ किले में आयकर अधिकारियों ने छापा मारा. इस काम में सेना और पुलिस की भी मदद ली गई.

तीन महीने तक जयगढ़ किले में खजाने की खोज जारी रही. हालांकि गायत्री देवी बार-बार यही दावा करती रहीं कि किले में कोई संपत्ति नहीं है पर सरकार ने संपत्ति के लिए किले को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया.

यह बात और है कि खुदाई खत्म होने के बाद सरकार ने दावा किया कि महल में कोई खजाना नहीं है.

खजाना किस शहर के विकास में लगाया गया ?-

कुछ इतिहासकारों का मानना ये भी है कि जयगढ़ किले का खजाना था, लेकिन राजा जयसिंह ने उसी खजाने से जयपुर शहर का विकास किया। लेकिन अब सवाल ये उठता है कि यदि सरकार को जयगढ़ किला का खजाना नहीं मिला तो आखिर वो खजान गया तो.. गया कहां गया? सवाल तो कई हैं लेकिन जवाब किसी के पास नहीं है।

जयगढ़ किला और उसका खजाना – अब देखते है कि इस खजाने का रहस्य कब तक पहेली बन इन किलों की दीवारों से टकराता रहेगा। या कभी कोई इस रहस्य की गूंथी को सुलझा पाएगा।

Jiwan Cannon in the Jaygarh Fort-एशिया की सबसे बड़ी तोप जयगढ़ किले में जिवान तोप
jaygarh Fort 

एशिया की सबसे बड़ी तोप जयगढ़ किले में जिवान तोप है – The largest cannon in Asia is the Jiwan Cannon in the Jaygarh Fort.

जयपुर में जयगढ़ किले पर रखी यह तोप एशिया की सबसे बड़ी तोप मानी जाती है। इस तोप का जब पहेली बार परीक्षण किया तो इसके गोले से शहर से 35 किलोमीटर दूर एक गांव में तालाब बन गया । आज भी यह तालाब मौजूद है | और गांव के लोगों की प्यास बुझा रहा है।

                                                    Read More:Allahabad Fort History in Hindi

तोप की लम्बाई और वजन कितना है ?-

विश्व की सबसे बड़ी यह तोप जयगढ़ किले के दरवाजे पर रखी है। तोप की नली से लेकर अंतिम छोर की लंबाई 31 फीट 3 इंच है। जब जयबाण तोप को पहली बार परिक्षण के लिए चलाया गया था तो जयपुर से करीब 35 किमी दूर स्थित चाकसू नामक स्थल पर गोला गिरने से एक तालाब बन गया था।

इस तोप का वजन 50 टन है। इस तोप में 8 मीटर लंबे बैरल रखने की सुविधा है। यह दुनिया भर में पाई जाने वाली तोपों के बीच सबसे ज्‍यादा प्रसिद्ध तोप है।

कितने गन पाउडर से चलती थी यह तोप ?-

यह तोप 35 किलोमीटर तक मार करने वाले इस तोप को एक बार फायर करने के लिए 100 किलो गन पाउडर की जरूरत होती थी। अधिक वजन के कारण इसे किले से बाहर नहीं ले जाया गया और न ही कभी युद्ध में इसका इस्तेमाल किया गया था।

किला जयगढ़ की कुछ रोचक बाते – Some interesting things about Jaygarh Fort

जयगढ़ किले को विजय किले के रूप में भी जाना जाता है। यह जयपुर के विख्यात पर्यटन स्थलों में से एक है जो शहर से 15 किमी. की दुरी पर स्थित है।

यह इगल्स के हील पर आमेर किले से 400 फूट की ऊंचाई पर स्थित है। इस किले के दो प्रवेश द्वार है जिन्हें दंगुर दरवाजा और अवानी दरवाजा कहा जाता है जो क्रमशः दक्षिण और पूर्व दिशाओ पर बने हुए है।

जयगढ़ किला महाराजा जय सिंह ने 18वीं सदी में बनवाया था और यह शानदार किला जयपुर में अरावली की पहाडि़यों पर चील का टीला पर स्थित है।

विद्याधर नाम के वास्तुकार ने इसका डिज़ाइन बनाया था और इस किले को जयपुर शहर की समृद्ध संस्कृति को दर्शाने के लिए बनवाया गया था।

इस किले के उंचाई पर स्थित होने के कारण इससे पूरे जयपुर शहर को देखा जा सकता है। यह मुख्य रुप से राजाओं की आवासीय इमारत था लेकिन बाद में इसका इस्तेमाल शस्त्रागार के तौर किया जाने लगा। इतिहास और वास्तुकला जयगढ़ किले के पीछे एक समृद्ध इतिहास है।

मुगल काल में जयगढ़ किला राजधानी से 150 मील दूर था और सामान की बहुतायत के कारण मुख्य तोप ढुलाई बन गया। यह हथियारों, गोला बारुद और युद्ध की अन्य जरुरी सामग्रियों के भंडार करने की जगह भी बन गया।

इसकी देखरेख दारा शिकोह करते थे, लेकिन औरंगज़ेब से हारने के बाद यह किला जय सिंह के शासन में आ गया और उन्होंने इसका पुनर्निमाण करवाया। इस किले के इतिहास से जुड़ी एक और रोचक कहानी है।

लोककथाओं के अनुसार, शासकों ने इस किले की मिट्टी में एक बड़ा खजाना छुपाया था। हालांकि एैसे खजाने को कभी बरामद नहीं किया जा सका। पहाड़ की चोटी पर स्थित होने के कारण इस किले से जयपुर का मनोरम नज़ारा देखा जा सकता है।

बनावट के हिसाब से यह किला बिलकुल अपने पड़ोसी किले आमेर किले के जैसा दिखता है जो कि इससे 400 मीटर नीचे स्थित है।विक्ट्री फोर्ट के नाम से भी प्रसिद्ध यह किला 3 किलोमीटर लंबा और 1 किलोमीटर चौड़ा है।

इस किले की बाहरी दीवारें लाल बलुआ पत्थरों से बनी हैं और भीतरी लेआउट भी बहुत रोचक है। इसके केंद्र में एक खूबसूरत वर्गाकार बाग मौजूद है। इसमें बड़े बड़े दरबार और हॉल हैं जिनमें पर्देदार खिड़कियां हैं। इस किले में दुनिया की सबसे बड़ी तोप भी है।

इस विशाल महल में लक्ष्मी विलास, विलास मंदिर, ललित मंदिर और अराम मंदिर हैं जो शासन के दौरान शाही परिवार रहने पर इस्तेमाल करते थे। दो पुराने मंदिरों के कारण इस किले का आकर्षण और बढ़ जाता है, जिसमें से एक 10वीं सदी का राम हरिहर मंदिर और 12वीं सदी का काल भैरव मंदिर है।

बड़ी-बड़ी दीवारों के कारण यह किला हर ओर से अच्छी तरह सुरक्षित है। यहां एक शस्त्रागार और योद्धाओं के लिए एक हॉल के साथ एक संग्रहालय है जिसमें पुराने कपड़े, पांडुलिपियां, हथियार और राजपूतों की कलाकृतियां हैं।

इसके मध्य में एक वाच टावर है जिससे आसपास का खूबसूरत नज़ारा दिखता है पास ही में स्थित आमेर किला जयगढ़ किले से एक गुप्त मार्ग के ज़रिए जुड़ा है।

इसे आपातकाल में महिलाओं और बच्चों को निकालने के लिए बनाया गया था। आमेर किले में पानी की आपूर्ति के लिए इसके केंद्र में एक जलाशय भी है।

जयगढ़ किले के आस-पास के पर्यटक आकर्षण – Tourist Attractions Near Jaigad Fort

आमेर का किला

विजय गढ़

अरावली की पहाड़ियाँ

"Jaygarh Fort" एक महलनुमा संरचना है, जो ‘चील की टीला’ पहाड़ियों पर स्थित है. जो मुकुट पर एक आभूषण के समान है. विद्याधर नामक एक प्रतिभाशाली वास्तुकार द्वारा डिजाइन किया गया किला शहर के समृद्ध इतिहास का एक रीगल अनुस्मारक है और इसका नाम जय सिंह द्वितीय के नाम पर रखा गया है. 

 

FAQs

Ques.-1: जयगढ़ का किला कहां स्थित है?

Ans.जयगढ़ किला अरावली पर्वतमाला के चील का टीला (ईगल की पहाड़ी) कहे जाने वाले पहाड़ी पर स्थित है; यह जयपुर, राजस्थान, भारत में आमेर के पास आमेर किले और माओटा झील को देखता है।

Ques -2:  जयबाण तोप की लंबाई कितनी है?

Ans. 31 फीट लंबी है तोप की नली, 50 टन का है वजन तोप की नली से लेकर अंतिम छोर की लंबाई 31 फीट 3 इंच है। जब जयबाण तोप को पहली बार टेस्ट-फायरिंग के लिए चलाया गया था तो जयपुर से करीब 35 किमी दूर स्थित चाकसू नामक कस्बे में गोला गिरने से एक तालाब बन गया था। इस तोप का वजन 50 टन है। इस तोप में 8 मीटर लंबे बैरल रखने की सुविधा है।

Ques -3: जयपुर में कौन सा दुर्ग है?
 
Ans. आमेर दुर्ग (जिसे आमेर का किला या आंबेर का किला नाम से भी जाना जाता है) भारत के राजस्थान राज्य की राजधानी जयपुर के आमेर क्षेत्र में एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित एक पर्वतीय दुर्ग है। यह जयपुर नगर का प्रधान पर्यटक आकर्षण है।

Ques.-4 : जयगढ़ दुर्ग का निर्माण कब हुआ?

Ans. इस दुर्ग का निर्माण जय सिंह द्वितीय ने १६६७ ई. में आमेर दुर्ग एवं महल परिसर की सुरक्षा हेतु करवाया था और इसका नाम उन्हीं के नाम पर रखा गया है।

Ques- 5: जयगढ़ किला का मालिक अब कौन है?

Ans. वर्तमान में, यह जयगढ़ पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा प्रशासित है और इसमें कई सार्वजनिक क्षेत्र हैं। इसकी पथरीली दीवारों में जयवन, पहियों पर दुनिया की सबसे बड़ी तोप, एक प्राचीन गन फाउंड्री और शाही अपार्टमेंट हैं जो 18वीं शताब्दी में महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा बनवाए गए थे।



एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.