ग्वालियर का किला घूमने की जानकारी और इतिहास – Gwalior Fort Information In Hindi

ग्वालियर का किला घूमने की जानकारी और इतिहास – Gwalior Fort Information In Hindi

ग्वालियर किला भारत में घूमने की सबसे अच्छी जगहों में से एक है। ये किला मध्य भारत की सबसे प्राचीन जगह में से एक है। ग्वालियर फोर्ट मध्यप्रदेश स्टेट के ग्वालियर शहर में एक पहाड़ी पर स्थित है, जिसे “ग्वालियर का किला” के नाम से भी जाना-जाता है। इस किले की ऊंचाई 35 मीटर है। यह किला करीब 10वीं शताब्दी से अस्तित्व में है। लेकिन इस किले में जो किला परिसर है उसके अंदर मिले शिलालेख और स्मारक इस बात का संकेत देते हैं कि ऐसा भी हो सकता है कि यह किला 6 वीं शताब्दी की शुरुआत में अस्तित्व में रहा हो। इस किले के इतिहास के अनुसार इसे विभिन्न शासकों द्वारा नियंत्रित किया गया है। अगर आप ग्वालियर की सेर करने आये हैं तो आप यहाँ स्थित ग्वालियर किला जरुर घूमे।


1. ग्वालियर का किला क्यों प्रसिद्ध है – Gwalior Fort Is Famous For In Hindi

ग्वालियर का किला क्यों प्रसिद्ध है – Gwalior Fort Is Famous For In Hindi

ग्वालियर के किले को भारत का “जिब्राल्टर” भी कहा जाता है। ग्वालियर का किला भारत के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण किले में से एक है। इस किले को बड़े ही रक्षात्मक तरीके से बनाया गया है, इस किले के दो मुख्य महल है एक गुजरी महल और दूसरा मान मंदिर हैं। इन दोनों को मान सिंह तोमर (शासनकाल 1486-1516 सीई) में बनवाया था। गुजरी महल को रानी मृगनयनी के लिए बनवाया गया था। दुनिया में “शून्य” का दूसरा सबसे पुराना रिकॉर्ड इस मंदिर में पाया गया है। जो इस किले के शीर्ष रास्ते पर मिलता है। इसके शिलालेख लगभग 1500 साल पुराने हैं।



2. ग्वालियर किले का इतिहास- Gwalior Fort History In Hindi

ग्वालियर का किला या फोर्ट भारत के राज्य मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में पहाड़ पर स्थित है, इस किले को भारत का सबसे बड़ा किला माना जाता है, इस स्थान के महत्व को अमर बनाने के लिए भारतीय डाक सेवा द्वारा एक डाक टिकट जारी किया गया है। ग्वालियर में सांस्कृतिक विरासत और साम्राज्यवाद बड़ी विविधता है। क्योंकि ये किला बेहद पुराना है और इस किले का निर्माण 8वीं शताब्दी में हुआ था और तब से कई राजाओं ने मुगलों और ब्रिटिशों के साथ मिलकर इस जगह पर राज किया और उन्होंने यहाँ कई स्थानों का निर्माण भी करवाया। इस किले को लेकर बताया जाता है कि मुगल सम्राट बाबर ने यहाँ के बारे में कहा था कि यह हिंद के किलों के गले में मोती के सामान है।

किले के इतिहास दो भागो में बंटा हुआ है जिसमें एक हिस्सा मान मंदिर पैलेस और दूसरा एक गुर्जरारी महल है।


3. ग्वालियर का किला किसने बनवाया था – Who Built Gwalior Fort In Hindi

ग्वालियर का किला किसने बनवाया था – Who Built Gwalior Fort In Hindi









इस किले का पहला भाग शुरुआती तोमर शासन में बनवाया गया था और दूसरा भाग जिसका नाम गुर्जरी महल है वो राजा मान सिंह तोमर ने 15वीं शताब्दी में अपनी प्रिय रानी, मृगनयनी के लिए बनाया गया था। अब यह संग्रहालय और महल है। एक रिसर्च में यह बताया गया है कि 727 ईस्वी में निर्मित किले के बारे में कहा गया था कि इस किले का इतिहास ग्वालियर पूर्व राज्य से जुड़ा हुआ है और इस पर कई राजपूत राजाओं ने राज किया है।

इसमें एक चतुर्भुज मंदिर है जो भगवान् विष्णु को समर्पित है। इस मंदिर को 875 ईस्वी में बनवाया गया था। इस मंदिर संबंध तेली के मंदिर से है। प्राप्त दस्तावेज की माने तो 15वीं शताब्दी से पहले ग्वालियर पर कछवाह, पाल वंश, प्रतिहार शासकों, तुर्क शासकों, तोमर शासकों जैसे राजवंशों का शासन किया था।

1519 में लोधी राजवंश से इब्राहिम लोधी ने किला जीता था इसके बाद उसकी मृत्यु के बाद मुगल सम्राट ने किले पर अधिकार कर लिया, लेकिन उसके बाद शेरशाह सूरी ने मुगल सम्राट के पुत्र हुमायूँ को हरा कर इस किले पर अपना कब्जा कर लिया और बाद में यह किला सूरी वंश के शासनकाल में आया।

1540 में उनके बेटे इस्लाम शाह ने अपनी राजधानी को दिल्ली से ग्वालियर बना दी, क्योंकि यह पश्चिम से से होने वाले लगातार हमलो से बचने के लिए यह एक सुरक्षित जगह थी। जब वर्ष 1553 इस्लाम शाह की मृत्यु हो गई, तब उनके अधिकारी आदिल शाह सूरी ने हिन्दू योद्धा हेम चंद्र विक्रमादित्य को राज्य का प्रधानमंत्री सेना प्रमुख रखा। बाद में हेम चंद्र विक्रमादित्य ने आदिल शाह शासन पर हमला किया और उन्हें 22 बार हराया। 1556 में आगरा और दिल्ली में अकबर की सेनाओं को युद्ध में हारने के बाद उन्होंने उत्तर भारत में विक्रमादित्य राजा के रूप में ‘हिंदू राज’ की स्थापना की और 07 अक्टूबर, 1556 को नई दिल्ली में पुराण किला में उनका राज्याभिषेक किया था।

4. ग्वालियर के किले में घूमने की खास जगह – Best Places To Visit In Gwalior Kila In Hindi

अगर आप किसी अच्छी जगह घूमना चाहते हैं और आपको इतिहास जानने के बारे में दिलचस्पी है, तो ग्वालियर से अच्छी आपके लिए कोई नहीं है। ग्वालियर का किला पूरे भारत में एक मोती के सामान है। यहाँ के किले की बनावट आने वाले पर्यटकों को बेहद लुभाती है। यहाँ हम ग्वालियर के किले की उन जगह की जानकारी दे रहे हैं, जहाँ आपको एक बार जरुर जाना चाहिए।

5. तेली का मंदिर ग्वालियर का किला – Teli Ka Mandir Gwalior History In Hindi

तेली का मंदिर ग्वालियर का किला – Teli Ka Mandir Gwalior History In Hindi

तेली का मंदिर का निर्माण प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज ने करवाया था। यह तेली का मंदिर एक हिंदू मंदिर है। यह मन्दिर विष्णु, शिव और मातृका को समर्पित किया गया है। इस मंदिर को प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज ने बनवाया था। यह किले का सबसे पुराना भाग है इसमें दक्षिण और उत्तर भारतीय स्थापत्य शैली का मिश्रण है। इसकी आयताकार संरचना के अंदर स्तंभ है जिसमें बिना खंभे वाला मंडप और शीर्ष पर दक्षिण भारतीय बैरल-वॉल्टेड छत है। इसमें उत्तर भारतीय शैली में एक चिनाई वाली मीनार है, इस मीनार की ऊँचाई 25 मीटर (82 फीट) है। इस मंदिर की बाहरी दीवारों में मूर्तियों को रखा गया था। बता दें कि तेली का मंदिर को तेल के आदमी का मंदिर भी कहा जाता है। यह मंदिर पहले भगवन बिष्णु का मंदिर था जो कि बाद में भगवन शिव का मंदिर बन गया। इस मंदिर के अंदर देवी, साँपों, प्रेमी जोड़े और मनुष्य की मूर्तियाँ है। यह मंदिर पहले विष्णु का मदिर था लेकिन मुस्लिम आक्रमण के समय इसे नष्ट कर दिया गया था। बाद में इसे शिव मंदिर के रूप में फिर से बनाया गया।

6. सहस्त्रबाहु (सास-बहू) मंदिर – Sahastrabahu (Sas-Bahu) Temple Gwalior Fort In Hindi

सहस्त्रबाहु (सास-बहू) मंदिर – Sahastrabahu (Sas-Bahu) Temple Gwalior Fort In Hindi

सास-बहू मंदिर कच्छपघाट वंश द्वारा 1092-93 में बनाया गया था। यह मंदिर विष्णु को समर्पित है। इसका आकार पिरामिड नुमा है, जो लाल बलुआ पत्थर से निर्मित है।


7. दाता बंदी छोड़ गुरुद्वारा ग्वालियर – Gurudwara Data Bandi Chhod Gwalior History In Hindi

7 दाता बंदी छोड़ गुरुद्वारा ग्वालियर – Gurudwara Data Bandi Chhod Gwalior History In Hindi


यह सिखों के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण जगह है। दाता बंदी छोड़ गुरुद्वारा, गुरु हरगोबिंद सिंह की याद में वर्ष 1970 में बनाया गया था। गुरुद्वारा दाता बांदी छोर का निर्माण उस जगह पर किया गया था जहां सिखों के 6 वें गुरु हरगोबिंद साहिब को गिरफ्तार किया गया था और 1609 में मुगल सम्राट जहांगीर ने 14 साल की उम्र में उनके पिता, 5 वें सिख गुरु अर्जन पर जुर्माना लगाया था जिसका भुगतान सिखों और गुरु हरगोबिंद द्वारा किया गया था। जहाँगीर ने गुरु गोबिंद साहिब को दो साल तक कैद में रखा था।

जब उन्हें कैद से मुक्त किया गया था तो उन्होंने अपने साथ बंधी बने 52 कैदियों को छोड़ने की प्रार्थना की। यह 52 कैदी हिन्दू राजा थे। जहाँगीर ने आदेश किया कि जो भी राजा गुरु का जामा पहनेगा उसे छोड़ दिया जायेगा। इसके बाद गुरु का नाम दाता बांदी छोर पड़ गया।

8. जौहर कुंड ग्वालियर – Jauhar Kund Gwalior Fort In Hindi

जौहर कुंड ग्वालियर – Jauhar Kund Gwalior Fort In Hindi


जौहर कुंड मान महल मंदिर के अंदर उपस्थित है। इस कुंड को लेकर एक अलग ही कहानी सामने आती है जो आपको इसके बारे और भी जानने के लिए मजबूर कर देगी बता दें कि जौहर का अर्थ होता है आत्महत्या।

जौहर कुंड ग्वालियर – Jauhar Kund Gwalior Fort In Hindi

जौहर कुंड वो जगह है जहाँ पर इल्तुतमिश के आक्रमण के समय राजपूतों की पत्नियों ने अग्नि में कूदकर अपनी जान दे दी थी। जब 1232 में ग्वालियर के राजा हार गए थे तो बहुत बड़ी संख्या में रानियों ने जौहर कुंड में अपने प्राण दे दिए थे।

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